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Thursday, February 16, 2012

मुझे सूरजमुखी उगाने हैं ......



सोचा था 
अब घेर लूंगी मैं 
अपने चारों ओर 
कुछ कंटीले तार 
मुझे सूरजमुखी उगाने हैं 
इस बार ..  
किसी ने बताया मुझे 
कंटीले तार लगे हों
तो नहीं होता खतरा जानवरों का ....
उनका भी नहीं 
जो अपने आनंद के लिए 
जुदा कर देते हैं फूलों को 
उनकी डाल  से..... 
आज तक सोचती थी 
बस धूप हवा ओर पानी ही तो चाहिए
फूलों को खिलखिलाने के लिए .....
लेकिन हैरानी हुई 
यह जान कर  
इन सबसे ज्यादा जरुरी हैं
कांटे .............!!!!
डरती थी लेकिन
 ये कंटीले तार 
कहीं मेरे फूलों को न चुभ जाएँ 
कहीं छीन न लें 
उनकी हंसी ......
एक सवाल भी
 लौट आता था
 बार बार 
सोचा 
पूछूंगी माली  से .......
क्या इस बार 
अच्छी खेप  आएगी
फूलों की.................!!!??
 लेकिन पता था 
मुझे उसका उत्तर भी... 
माली है न .......
वह तो हिमायत ही करेगा
 काँटों की .
फूलों के लहलहाने में ही तो 
छुपा है उसका भविष्य
लेकिन कोई नहीं चाहता 
 यह जानना  
क्या चाहते है फूल ....!!??
क्या उन्हें रहना है 
काँटों के घेरे में......!!??
क्या उन्हें पसंद है जीना  
 अपनी  सारी उम्र 
पहरे में ही ........
एक दिन बेरहमी से 
तोड़ लिए जाने के लिए ......!!
मैं जानती हूँ 
फूलों की ख्वाहिश 
वह चाहते हैं 
मैं बंद कर दूं 
 अपने अंधेरों को
 कंटीले तारों में ......
उन्हें तो बस 
 चमकता हुआ सूरज चाहिए ......




2 comments:

  1. क्या चाहते है फूल ....!!??
    क्या उन्हें रहना है
    काँटों के घेरे में......!!??
    क्या उन्हें पसंद है जीना
    अपनी सारी उम्र
    पहरे में ही ........
    एक दिन बेरहमी से
    तोड़ लिए जाने के लिए ......!!उफ़ !दिल ए दर्द बयानी को बस इतना ही काफी है .......रश्मि इन पंक्तियों के माध्यम से जो कहना चाहती थी बखूबी कहा है ...!!बधाई !!

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  2. बहुत सुन्दर.....कविता के माध्यम से इस मासूम से आयाम को अद्धभुत तरीके से स्थापित किया आपने...शुक्रिया ... साझा करने के लिये.

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